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प्रवास का ज्योतिष

विदेश यात्रा और विदेश-निवास योग

विदेश जाना — पढ़ाई, नौकरी, या बसने के लिए — मुख्यतः बारहवें भाव (दूर और विदेशी भूमि), नौवें भाव (लंबी यात्रा), चौथे भाव (घर और जड़ें), राहु (सीमाएँ पार करने की प्रवृत्ति), और इन्हें सक्रिय करने वाली दशा से देखा जाता है। यह हब विदेश योग के पीछे के कारकों को जोड़ता है।

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Dasha calculator

A move abroad usually lands in a dasha activating the 12th or 9th house — find your period.

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कौन से भाव विदेश जाना दिखाते हैं

विदेश-निवास मुख्य रूप से बारहवें भाव (विदेशी भूमि और जन्मस्थान से दूर रहना), नौवें भाव (लंबी दूरी की यात्रा), और चौथे भाव (घर व जड़ें) से देखा जाता है। इन भावों से जुड़ा राहु विदेश जाने की प्रबल इच्छा और क्षमता को मज़बूत करता है।

अपने जाने का समय

आप कब विदेश जाएँगे, यह बारहवें या नौवें भाव के स्वामियों की दशा और इन भावों पर शनि व गुरु के गोचर से पढ़ा जाता है। कुंडली संभावना दिखाती है; दशा और गोचर समय बताते हैं।

सामान्य प्रश्न

क्या मैं अपनी कुंडली के अनुसार विदेश में बसूँगा?

विदेश-निवास बारहवें भाव (विदेशी भूमि), नौवें भाव (लंबी यात्रा), चौथे भाव (घर), और इनसे जुड़े राहु से पढ़ा जाता है। इन कारकों और चल रही दशा के बीच मज़बूत संबंध सच्चे विदेश योग का संकेत देता है।

कौन सा भाव विदेश-निवास दिखाता है?

बारहवाँ भाव विदेशी भूमि और जन्मस्थान से दूर रहने का प्रमुख भाव है, जिसे लंबी यात्रा के नौवें भाव और घर के चौथे भाव का सहयोग मिलता है। इन भावों को छूता राहु विदेश-निवास के संकेत को मज़बूत करता है।

मैं विदेश कब जाऊँगा — कुंडली क्या कहती है?

समय बारहवें या नौवें भाव के स्वामियों की दशा और इन भावों पर शनि व गुरु के गोचर से पढ़ा जाता है। सबसे संभावित अवधि तब खुलती है जब कोई विदेश-भाव की दशा अनुकूल गोचर के साथ चले, जो आपके सटीक जन्म समय से पढ़ी जाती है।