धन योग और दूसरा व ग्यारहवाँ भाव
धन दूसरे भाव (बचत और संपत्ति) और ग्यारहवें भाव (आय और लाभ) से पढ़ा जाता है। धन योग तब बनते हैं जब इनके स्वामी आपस में जुड़ते हैं, खासकर गुरु या शुक्र के शामिल होने पर। मज़बूत और अच्छी तरह जुड़ी यह जोड़ी वास्तविक धन-क्षमता दर्शाती है।