वैदिक ज्योतिष के अनुसार मेरा विवाह कब होगा?
वैदिक ज्योतिष विवाह का समय आपके सातवें भाव के स्वामी, शुक्र या गुरु की दशा से जोड़ता है। सबसे संभावित अवधि वह होती है जब इनमें से कोई दशा चल रही हो और कोई अनुकूल गोचर आपके सातवें भाव या नवांश को सक्रिय करे। अपनी वर्तमान दशा निकालकर निकटतम योग पता करें।
कौन सी दशा विवाह कराती है?
विवाह अक्सर सातवें भाव के स्वामी, शुक्र (विवाह कारक), या गुरु की विंशोत्तरी महादशा या अंतर्दशा में होता है — खासकर जब वह अवधि दूसरे या ग्यारहवें भाव को भी सक्रिय करे। सटीक आकलन के लिए आपका सही जन्म समय चाहिए।
मेरे विवाह में देरी क्यों हो रही है?
सामान्य वैदिक कारण हैं — पीड़ित सातवाँ भाव, कमज़ोर या वक्री सातवाँ स्वामी, सातवें भाव पर शनि या राहु की दृष्टि, या मंगल दोष। ये आमतौर पर विवाह को रोकते नहीं बल्कि किसी बाद की मज़बूत दशा तक टाल देते हैं।
क्या मंगल दोष सचमुच विवाह में देरी कराता है?
मंगल दोष (मंगल का पहले, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में होना) विवाह में देरी या तनाव ला सकता है, पर यह अक्सर अन्य स्थितियों से निरस्त हो जाता है और इसे ज़रूरत से ज़्यादा बढ़ा-चढ़ाकर बताया जाता है। दूसरी मांगलिक कुंडली से मिलान पारंपरिक उपाय है। चिंता से पहले अपनी कुंडली जाँचें।