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विवाह का समय

विवाह कब होगा?

विवाह का समय वैदिक ज्योतिष में सबसे ज़्यादा पूछा जाने वाला प्रश्न है। इसे सातवें भाव और उसके स्वामी, विवाह कारक शुक्र और गुरु, नवांश (D9) कुंडली, और उन ग्रहों की दशा-अवधि से देखा जाता है जो इन्हें सक्रिय करती हैं। यह हब आपको ज़रूरी कैलकुलेटर, परिभाषाएँ और मिलान उपकरण तक ले जाता है — और आप Stellr से अपनी कुंडली मुफ़्त में पढ़वा सकते हैं।

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See which Vimshottari dasha period is running — marriage usually arrives in the dasha of the 7th lord, Venus, or Jupiter.

Kundli matching

Once a match appears, check compatibility with traditional guna milan and chart comparison.

Mangal Dosha guide

The most common reason cited for delayed marriage — what it actually means and when it matters.

अपनी दशाओं से विवाह का समय पढ़ें

वैदिक ज्योतिष विवाह का समय विंशोत्तरी दशा प्रणाली से तय करता है: विवाह का योग आमतौर पर सातवें भाव के स्वामी, शुक्र, या गुरु की महादशा या अंतर्दशा में बनता है। पहले अपनी चल रही दशा निकालें, फिर देखें कि वह किन भावों को सक्रिय कर रही है।

विवाह में देरी क्यों होती है

देरी अक्सर पीड़ित सातवें भाव, कमज़ोर या वक्री सातवें स्वामी, सातवें भाव पर शनि या राहु के प्रभाव, या मंगल दोष से जुड़ी होती है। इनमें से ज़्यादातर समय की समस्या होती है, स्थायी रुकावट नहीं — ये बताते हैं कि कौन सी दशा अंततः विवाह कराती है।

सामान्य प्रश्न

वैदिक ज्योतिष के अनुसार मेरा विवाह कब होगा?

वैदिक ज्योतिष विवाह का समय आपके सातवें भाव के स्वामी, शुक्र या गुरु की दशा से जोड़ता है। सबसे संभावित अवधि वह होती है जब इनमें से कोई दशा चल रही हो और कोई अनुकूल गोचर आपके सातवें भाव या नवांश को सक्रिय करे। अपनी वर्तमान दशा निकालकर निकटतम योग पता करें।

कौन सी दशा विवाह कराती है?

विवाह अक्सर सातवें भाव के स्वामी, शुक्र (विवाह कारक), या गुरु की विंशोत्तरी महादशा या अंतर्दशा में होता है — खासकर जब वह अवधि दूसरे या ग्यारहवें भाव को भी सक्रिय करे। सटीक आकलन के लिए आपका सही जन्म समय चाहिए।

मेरे विवाह में देरी क्यों हो रही है?

सामान्य वैदिक कारण हैं — पीड़ित सातवाँ भाव, कमज़ोर या वक्री सातवाँ स्वामी, सातवें भाव पर शनि या राहु की दृष्टि, या मंगल दोष। ये आमतौर पर विवाह को रोकते नहीं बल्कि किसी बाद की मज़बूत दशा तक टाल देते हैं।

क्या मंगल दोष सचमुच विवाह में देरी कराता है?

मंगल दोष (मंगल का पहले, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में होना) विवाह में देरी या तनाव ला सकता है, पर यह अक्सर अन्य स्थितियों से निरस्त हो जाता है और इसे ज़रूरत से ज़्यादा बढ़ा-चढ़ाकर बताया जाता है। दूसरी मांगलिक कुंडली से मिलान पारंपरिक उपाय है। चिंता से पहले अपनी कुंडली जाँचें।